जिस समय आप को ज्ञात हो कि रोगी का जो हिस्सा जला हुआ है जैसे कि अगर सामने का हिस्सा जला है तो उसे पीठ के बल लेट जाएं और अगर पीठ के बल जला है तो उससे पेट के बल लिटाया कंधों के नीचे तकिया या कंबल और अगर कुछ नहीं मिले तो कपड़ों को रखने की कोशिश करें और अपने पास दो व्यक्तियों से अधिक को इकट्ठा ना होने दें
एक व्यक्ति को रोगी के सिर के पीछे घुटनों के बल बैठकर योगी की दोनों बांहों को अपने कलाइयों से पकड़ कर उसके सिर के एरिया लगाएं 30 से 25 मिनट तक दूसरा व्यक्ति रोगी को जीभ को बाहर की तरफ रखें जिससे वायु के अंदर जाने में सुगमता रहे इस प्रक्रिया से फेफड़े अपना काम करना शुरू करते हैं
तृतीय विधि -
यह है विधि जो प्रकार की होती है-
१-मुंह से मुंह लगाकर
२-मुंह से नाक के द्वारा
१- मुंह से मुंह लगाकर-
इस विधि से रोगी को तुरंत राहत पहुंचाई जा सकती है इस विधि को शुरू करने के लिए पहले रोगी का मुंह साफ करें अजीब को पकड़कर तीन से पांच बार अंदर बाहर कर के गले को नरम करें क्योंकि विद्युत झटका लगने के बाद रोगी के जबड़े में कसावत आ जाती है यदि दांत आपस में एक दूसरे से जगह लिए हूं तो रोगी के ज बढ़ो को खोलें और उसके मुंह में रुमाल डालकर साफ करें पहले आप स्वयं एक गहरी सांस खींचें और तब उसके मुंह में अपना मुंह में रखकर उसके फेफड़ों में हवा दें।
२-मुंह से नाक के द्वारा-
यह विधि प्राथमिक उपचार के लिए काफी लोकप्रिय है योगी का मुंह वह नाक अच्छी तरह से साफ करें गहरी सांस खींचकर आप अपने मुंह को रोगी की नाक से लगाएं और फेफड़ों में हवा भरने और शीघ्र ही अपना मुंह हटा ले जिससे हवा बाहर आ सके यह प्रक्रिया आपको 15 से 20 बार करनी है।
चतुर्थ विधि -
कि तुम साथ देने के लिए यंत्रों का भी उपयोग किया दिया जाता है जिन्हें कृतिम् शवशन यंत्र कहते है।
इसमें रबड़ के वालों में से हवा फिल्टर होकर चेंबर में जाती है और इनलेट आउटलेट वाल्व लगे होते हैं जो कि रविवार को दबाने वट छोड़ने के साथ खुलते बंद होते हैं हवा 1 मार्च के माध्यम से जोगी के फेफड़ों में जाती है।
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