Monday, 8 June 2020

प्राथमिक उपचार 8 जून 2020

प्राथमिक उपचार का मतलब होता है कि अगर आपका कहीं एक्सीडेंट हो गया हो तो घटना हो गई हो तो तुरंत जो विचार किया जाता है उसे प्राथमिक उपचार कहते हैं जैसे कि सबसे बड़ी चीज होती है कि आपके खून को रोकना अगर खून रुक जाता है तो फिर हम आसपास डॉक्टर के यहां जा करके अपना इलाज अच्छे से करवा सकते हैं इसके लिए हमें बैंडेज पट्टी आवश्यकता होती है

जैसे की डिटॉल 
दर्द कि गोली
रुई
कच्चा प्लास्टर
उपरोक्त साधनों द्वारा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल ले जाने से पूर्व में प्राथमिक उपचार दिया जाता है या दिया जा सकता है

किसी भी व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देते समय निम्न बातों का ध्यान देना चाहिए
१- दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की चोट देखकर घबराना नहीं चाहिए।

२-जहां भी दुर्घटना हो अगर यह बात आपको जितनी जल्दी पता चले उतनी जल्दी जा करके उसका उपचार मतलब प्राथमिक उपचार करना चाहिए अगर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को बेहोश है खून निकल रहा है तो सबसे पहले उसका खून रोकने की कोशिश करें।

३-प्राथमिक उपचार से पहले यह जांच लें कि उसे चोट या दर्द कहां हो रहा है।
४-दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के पास ज्यादा भीड़ इकट्ठा न होने दें और उसे खुली हवा में बैठाए।
५-अगर व्यक्ति जल गया है तो उसको कंबल से ढक दें अगर वह पेट के साइड जला है तो उसे पीठ के बल लिटाए और पीठ के साइड जला है तो उसे पेट के बल लिटाए।
६-आग लगने व बिजली के झटके आने के संदर्भ में कार्यशाला के मेन स्विच को ऑफ करें और फायर ब्रिगेड को सूचित करें।



प्रारंभिक प्राथमिक उपचार
   
१- अगर किसी व्यक्ति को विद्युत का झटका लगा है तो उसके लिए प्राथमिक उपचार अलग होता है जैसे

A- व्यक्ति को बिजली के संपर्क से सूखी लकड़ी तथा रबड़ के जूते पहनकर तुरंत छुड़ाएं और मेन स्विच को बंद करें यदि ओवरहेड लाइन पर कोई इलेक्ट्रीशियन चिपक गया है तो तुरंत तारों पर लोहे की चैन फेंक कर उनको शॉर्ट सर्किट होने से सप्लाई बंद हो जाएगी।
B- यदि व्यक्ति झुलस गया हो-
                                      यदि कपड़ों में से चिंगारी निकल गई हो तो तुरंत भुजाएं यदि शरीर के किसी भी भाग में छाले पड़ गए हो तो उनके ऊपर दबाव डालकर उन्हें फोड ना नहीं  चाहिए।
C-यदि व्यक्ति झटका खाने के बाद बेहोश है तो-
                    यदि व्यक्ति झटका खाने के बाद बेहोश हो गया है तो पहले आप यह जांच करने कि उसके हृदय की गति चल रही है कि नहीं और हाथ की नब्ज देखें अगर सही चल रही है तो सांस क्रिया दे कर के आप उसमें नाक से नाक या मुंह से मुंह विधि द्वारा ऑक्सीजन दे सकते हैं ।
रोगी को प्राथमिक उपचार देने के बाद तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें।
प्राथमिक उपचार की कुछ विधियां होती हैं जैसे कि
१-प्रथम विधि- 
                     योगी के वस्त्रों को सर्वप्रथम ढीला करें रोगी को दोनों भुजाओं को आगे की ओर से लाएं रोगी के एक तरफ वीरासन बना कर बैठे अपने दोनों हाथों की अंगुलियां द्वारा उसकी पसलियों में इस तरह आकृति बनाएं की अंगूठी मिल जाए।
अबे घुटनों पर वजन देकर अपने शरीर के वजन को डालते हुए पसलियों के ऊपर दबाव बनाएं दो 3 सेकंड के लिए और फिर हटा दें और फिर उसके फेफड़ों में स्वास्थ क्रिया आरंभ करें कम से कम से कम 5 से 20 मिनट तक की होनी चाहिए

                

                                    

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