Wednesday, 10 June 2020

आग कितने प्रकार के होते हैं 10 जून 2020

आग चार प्रकार के होते हैं-

१-लकड़ी जुट कपड़ा कागज से लगी आग हो तो उसे बुझाने के लिए शीतल जल को डालना चाहिए।

२-मिट्टी का तेल पेट्रोल डीजल मोबिल आयल से लगी आग को बुझाने के लिए फॉम टाइप अग्निशामक यंत्र और कार्बन डाइऑक्साइड नामक अग्निशामक यंत्र काम में आते हैं।

३-एल.पी.जी. गैस द्वारा लगी आग को बुझाने के लिए शुष्क अग्निशामक यंत्र का उपयोग करना चाहिए।

 ४- बिजली के तारों उपकरणों धात्विक पदार्थ से लगी आग को बुझाने के लिए सी. टी.सी. कार्बन टेट्राक्लोराइड यंत्र और हेलो अग्निशामक यंत्र बुझाने के काम में आता है।

 चोट कितने प्रकार के होते हैं और उनसे बचाव के उपाय-
निम्न प्रकार के होते हैं-

 
१-कट जाना या रगड़ खाना -
                            अगर हम किसी ऐसे जगह पर काम कर रहे हैं जिनके सतह पर किनारों में मिट्टी हो कंकड़ हो तो यहां पर हमें नुकीली चीज मिलते हैं जिनसे हमें कट लगने की संभावना या खरोच की संभावना अधिक होती है तो इसके बचाव के लिए हमें चमड़े के दस्ताने और कपड़े अच्छे पहनने चाहिए।

२-मांसपेशियों तथा जोड़ों में तनाव-
                                       हम कभी-कभी जोश में आकर कोई भारी चीज उठा लेते हैं जिससे हमें हमारे मांस पेशियों में जकड़न दर्द हो जाता है और यह हमें झटका देने के कारण मुंह भी सकते हैं अंततः रीड की हड्डी को सीधा रखते हुए बोझ को उठाना चाहिए।

३-पैर या  हाथों का कुचला जाना-
                                        हमें ध्यान में रखना चाहिए कि जब भी हम कोई सामान जो हमने उठाया है अगर वह बाइडियो में नीचे रखना है तो अपने पांव को बचा करके आराम से नीचे रखना चाहिए नहीं तो हमें पांव में चोट आ सकती है।


पहले ही मैंने आपको आग कितने प्रकार के होते हैं वह मैं बता चुका हूं अब यह आग किस वजह से लगते हैं या इनके लगने के कारण क्या होते हैं वह बताएंगे आपको-

१- विद्युतीय तारों का ढीला होना।
२-विद्युतीय तारों पर अत्यधिक लोड देना।
३-बिजली के शॉर्ट सर्किट हो जाने के कारण।
४-कारखानों में धूम्रपान करने के कारण क्योंकि हम सब धूम्रपान करके बीड़ी या सिगरेट बिना बुझाए फेंक देते हैं जिससे कि वहां पर ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण वहां पर आग लगने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है।




कार्यशाला में आग लगने से बचाव के उपाय-

जैसे कि हम सभी जानते हैं कि अगर हम कोई भी कार्य करने के बाद हम उस सामान को व्यवस्थित ढंग से नहीं रखते हैं तो नुकसान अपना होता है जैसे कि आप अपने औजारों से आपने काम किया फिर उसे उसके स्थान पर नहीं रखा बाय हुए हो सकता है कि आपका पांव फिसल जाए आप को चोट लग सकती है ऐसे बहुत से कारण होते हैं जो मैं आपको आगे बताने जा रहा हूं-
१ - आप तेल वह ज्वलनशील पदार्थों का अलग से कई साला होना चाहिए जिससे कि कार्यशाला में आग लगने के बाद भी आपका ज्यादा नुकसान ना हो।
२-कार्यशाला में काम करने के बाद तेल व गिरीश या चिकने पड़ा के गीले कपड़े आप हटा लें क्योंकि इसे स्पाइकिंग के बाद आग लगने का खतरा ज्यादा रहता है।
३-कार्यशाला में अगर हम विद्युत वायदों की फिटिंग सही से ना करें तो हवा चलने पंखा चलने से वह लूज होते हैं और तब एक दूसरे पर घर्षण करके उनमें चिंगारी निकलती है जिससे आग लगने का खतरा बना रहता है।
४-कार्यशाला में मशीनों के अनुसार उचित विद्युत लोड होना चाहिए ज्यादा लोड होने पर गर्म होंगी मतलब गर्म होंगी और आग लगने का खतरा बना रहेगा।
५-विद्युत कार्यों में जो भी आजाद उपयोग होते हैं इन बातों का आप ध्यान रखें कि वह इंसुलेटेड होने चाहिए नहीं तो इससे मशीनों को और आपको जान मान की हानी और कार्यशाला में भी आग लग सकती है।
६-कार्यशाला में कभी भी धूम्रपान नहीं करना चाहिए क्योंकि उसकी बीड़ी या  सिगरेट के चिंगारी से आग लग सकता है।
७-कॉल साला में आग कभी नहीं लगाना चाहिए मतलब जो भी खराब मटेरियल हो उसको आप बाहर निकाल ले उसके बाद आग लगाएं।
८-वेल्डिंग के गैस सिलेंडर हमेशा एक निश्चित और सुरक्षित स्थानों पर रखें।



      

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