Saturday, 20 June 2020

औजार 20 जून 2020

स्टेट पिन हैमर-
            यह है मैं लोहे के फॉर्जिंग  कैरके बनाए जाते हैं इनका उपयोग कारपेंटर शीट मेटल आदिकाल में होता है। इनका वजन-125, 250,500, ग्राम होता है।

बॉल पीन हैमर हैंडल सहित-

Friday, 19 June 2020

औजार 19 जून 2020

3 - इन्सुलेट ड राउंड नोज प्लायर-
                              यह औजार स्टील का बना होता है इसका आगे का मुंह लंबा और गोला होता है इसका कटल अधिक गेज की तारों को काटने के काम में आता है इससे तारों की गोल्ड रिंग बनाई जा सकती है इसकी लंबाई 100 एमएम से 200 एमएम तक होती है।
4- इंसुलेटड स्क्रू ड्राईवर  -
                              यह विद्युत का सबसे मुख्य औजार है इसका हैंडल लकड़ी प्लास्टिक सोलोलाईड का बना होता है इसका ब्लेड सख्त स्टील का बना कर टेंपल किया जाता है इसकी लंबाई हैंडल के भाग को छोड़कर मापी जाती है इस ग्रुप को खोलना और कसम इसका मुख्य उपयोग है।
5- बाल पिन हैमर-
                       बॉल पीन हैमर में एक साइड की आकृति बाल की तरह होती है इसका नाम बालपन है मन है इसे गिट्टी के लिए दीवारों में जगह बनाने वायरिंग में क्लिप लगाने और रिवितिंग  करने के काम में लेते हैं इसका हैंडल लकड़ी का बना होता है इसका वजन 120g , 250g, 500g,aur 1kg   ।
6-। क्रॉस पीन हैमर-
                      इससे हेमा को शीट मेटल के कार्य के लिए उपयोग माना जाता है इसका वजन 125, 250,500,g hai
          

Wednesday, 17 June 2020

सामान्य हस्त औजार 18 June 2020

औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन के लिए हमें अधिकांशत है क्रियाएं स्वचालित मशीनों से की जाती है फिर भी हमें ऐसे काम होते हैं जो कार्य विंच पर किए जाते हैं ताकि पर शुद्धता मिल सके और हमें यह हंसता हो जाए छोटी और बड़ी कार्यशाला में उपयोग किए जाते हैं सामान्य हंसता हो जाए जैसे कि-

                   1- धारक औजार 
                    2- मापन औजार
                    3- करतन औजार
हजारों की पहचान और उनका उपयोग-

विभिन्न प्रकार के औजारों का विवरण निम्न प्रकार हैं-

1- इंसुलेटेड कांबिनेशन प्लायर-( पीलाश)-
                                    यह इलेक्ट्रिशियन कार्य का सबसे महत्वपूर्ण औजार  है यह स्टील का बना होता है इसकी लंबाई 150 मिलीमीटर से 200 मिलीमीटर तक होती है। इसका कटर तारों को काटने पकड़ने और मुंह के काम में आता है।

2- इंसुलेटेड़ साइड कटिंग प्लायर-
                               यह स्टील का बना होता है इसकी एक साइड पर कटर होता है यह है तारों को काटने के काम में आता है इसकी साइज 75,100,150,एमएम में होती

       
                      

Tuesday, 16 June 2020

17 जून 2020 संस्थानों के विभिन्न भागों का भ्रमण करना

आईटीआई संस्थानों के विभिन्न भागों का भ्रमण और अवलोकन करना-
           आईटीआई संस्थान की वर्कशॉप में आधुनिक तकनीकों से प्रयुक्त मशीनें और उपकरण उपयोग में लिए जाते हैं इन मशीनों और उपकरणों के अध्ययन की अति आवश्यकता होती है जिससे मशीनों को खराब होने से और किसी दुर्घटना से बचाया जा सकता है-
    1-  इलेक्ट्रिशियन वर्क शॉप-
                                    इस प्रकार की वर्कशॉप में सभी प्रकार की डीसी एसी मोटर ट्रांसफॉर्मर डीसीएसी मशीन वाइंडिंग विद्युतीय मापन आदि के मशीनों के बारे में हम अध्ययन कहते हैं।
    2- इलेक्ट्रॉनिक वर्कशॉप-
                                 इस वर्कशॉप में सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक टेस्ट उपकरण जैसे कैथोड रे आइसोलेटर प्लस जनरेटर सिंगल ट्रेक बीएसटी टीवी एलसीआर विदेश मल्टीमीटर कलर टीवी पैटर्न आदि के बारे में हम अध्ययन कहते हैं।
     3- फिटर वर्कशॉप-
                             इस वर्कशॉप में बहुत से औजार उपयोग में रखे जाते हैं जिनके बारे में हम अध्ययन कहते हैं ऑपरेशन प्रशिक्षण द्वारा संपादित किए जाते हैं-
                फाइलिंग  मार्किंग ड्रिलिंग हेक्सा शिपिंग ग्राइंडिंग 
कटिंग ले थ ऑपरेशन फिटिंग फिनिशिंग सोल्डरिंग आदि के बारे में बताया और सिखाया जाता है 
   4- कंप्यूटर वर्कशॉप -
                        इस वर्कशॉप में लैपटॉप पेंटियम कंप्यूटर सॉफ्टवेयर अलग अलग वर्कशॉप में ऑपरेटिंग सिस्टम को 
लेन के द्वारा जोड़ा जाता है 
  
                  
                                 
        

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद रोजगार पाने के अवसर 16 जून 2020

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद-
   हम पैसे छठ पूजा करने के पश्चात किसी भी सार्वजनिक या निजी संगठन या शैक्षणिक स्थानों में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं अन्यथा हम अपना स्वयं का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर सकते हैं।
  
5s संकल्पना-----
                  5s यह एक ऐसी प्रणाली है जो एक व्यवस्थित कार्य को कायम रखते हुए  अपव्यय को कम कहती है और उत्पादकता बढ़ाती है
 यह एक जापानी शब्द है जो 5 समूहों को मिलकर बना है-


     1- SEIRI -shorting  छ ट नी
                              सभी अनावश्यक उपकरण अथवा पुल जी को हटाना मतलब जो भी फालतू सामान रखकर उसे हटाए।

2  - SEITON। Settings in order -
कर्म निर्धारण
   
हर वस्तु के लिए एक स्थान निर्धारित होती है जो भी वस्तु आप कहीं से उठाएं और ले जाएं अपना काम खत्म होने पर आपका कर्तव्य बनता है कि आप उस सामान को ले जाकर उचित स्थान पर रखें ताकि बाद में खोजने में परेशानी ना हो उस समय व्यर्थ में खर्च ना हो।

3-    S EISO।  Simplifying
        सरलीकरण
उत्पादन की सारी प्रक्रिया सरल और स्पष्ट होनी चाहिए।

4- S EIKETSU।  Satndardizing -
         प्रमाणीकरण
सभी वस्तुएं उपकरण प्रमाणीकरण होनी चाहिए सभी का स्तर एक समान होना चाहिए।

5-SHITSUKE सेल्फ discipline 
           स्वयं अनुशासन
 प्रमापो को निर्धारित करना और उनका अवलोकन करना जब आप 4 इयर्स का ध्यान रखते हैं तो 5 s अपने आप ही लागू हो जाता है।

          
                  
                     

Friday, 12 June 2020

आपदाएं 11 जून 2020

कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित आपदा व्यवसायिक स्वस्थ आपदाओं की श्रेणी में आता है।

कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर उनके कार्य और कार्य स्थल के अनुसार पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को सामान्यता है निम्न आपदाओं के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है-

१- एरोगोनोमिकल आपदा -
                                 इसके अंतर्गत थकान बोरियत मतलब बोल होना एक ही काम को बाल बाल करने से आपके मन में खींझ उत्पन्न होना । और एक ही स्थान पर बैठे जाना शरीर का स्वास्थ्य खराब होना यह संबंधित स्वास्थ्य आपदाएं हैं इससे हमें मांसपेशियों में दर्द खिंचाव और अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

२-भौतिक आपदाएं-
                            इनके अंतर्गत टॉप अथवा सीट कंपन दबाव यह संबंधित आपदाएं शामिल होती हैं जिनसे हमें बहरापन त्वचा संबंधी बीमारियां उत्पन्न होती हैं।

३-रासायनिक आपदाएं-
                            उद्योगों में रसायनों का उपयोग एक सामान्य बात है जिससे हर वर्ष अनेक प्रकार के नए राशन ओं का उपयोग कारखानों में हमेशा होता जाता है इन रसायनों से अपने स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक बीमारियों का सामना करना पड़ता है जैसे त्वचा श्वसन अनेक बीमारियों का हम सामना करते हैं धूल रासायनिक पदार्थों के कल रासायनिक अपशिष्ट दुर्गंध हमारे शरीर को गंभीर आपदाएं उत्पन्न कर सकते हैं। 
४ -रेडिएशन आपदाएं-
                        यह हमें एक्स-रे पराबैगनी किरण के संपर्क में आने से हमें विभिन्न प्रकार के बीमारियों का सामना करना पड़ता है जैसे आंखों की क्षति त्वचा का जलन त्वचा का कैंसर आदि।
५ - यांत्रिक आपदाएं-
                  यह उद्योगों में होने वाले आपदाओं का एक हिस्सा है इसमें लगभग मशीनों के द्वारा आपदाएं होने की संभावना या मशीनों के द्वारा हमें क्षति पहुंचती है।

६-विद्युतीय आपदाएं-
                       कर्मचारियों को कार्य करते समय विद्युत के झटकों का भी सामना करना पड़ता है जिससे हमारे शरीर को निम्नलिखित क्षति का भी सामना करना पड़ता है-
१-कटे हुए बिजली के ताल या अनुचित उपयोग अथवा क्षतिग्रस्त बोर्ड।
२-खराब उपकरण अथवा वायर।
३-सफाई में पानी का उपयोग।
४-इंसुलेटेड औजारों का ना होना।

७- कंपन और ध्वनिकिय समधी आपदाएं-
                 काज के वातावरण में ध्वनि यांत्रिक कंपनी को हम उत्पन्न होने वाले आपदाओं को vibroacouatic हजार्ड कहते है ।
कंपन और धन संबंधी आपदाओं से बचने के लिए निम्नलिखित तरीके हैं-
१-ध्वनि तथा यांत्रिक कंपनी से स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव को नापने तथा उसका आकलन करने के तरीकों को विकसित करें।
२-इन खतरों के नुकसानदायक असर को मिटाने अथवा कम करने के तरीके विकसित करें।

७-उष्मी य आपदाएं-
                         यह आपदाएं उन चीजों या पदार्थों से उत्पन्न होती हैं जो ऊर्जा के रूप में ऊष्मा का संचार करते हैं जैसे खुले में लगी आग उसमें आपदा का एक उदाहरण है क्योंकि उसके आसपास के वातावरण में उसमें उत्पन्न होता है।

इन आपदाओं को निम्न प्रकार से बचा जा सकता है-
१- स्वयं को वर्कशॉप की संपूर्ण कार्य विधि और उपकरण से परिचित होना चाहिए।
२- वह किताब के अंतर्गत लगे सभी चिन्हों के बारे में जानकारी होना चाहिए।
३-अग्निशामक यंत्रों का उपयोग करना आना चाहिए
४- वर्कशॉप में आग लगने के कारण जैसे धूम्रपान शॉर्ट सर्किट आग से बचाव करना चाहिए।
५- वर्कशॉप में विद्युत के तार नंगे नहीं होना चाहिए।
६- वर्कशॉप में कार्य करते समय सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।




    

Wednesday, 10 June 2020

आग कितने प्रकार के होते हैं 10 जून 2020

आग चार प्रकार के होते हैं-

१-लकड़ी जुट कपड़ा कागज से लगी आग हो तो उसे बुझाने के लिए शीतल जल को डालना चाहिए।

२-मिट्टी का तेल पेट्रोल डीजल मोबिल आयल से लगी आग को बुझाने के लिए फॉम टाइप अग्निशामक यंत्र और कार्बन डाइऑक्साइड नामक अग्निशामक यंत्र काम में आते हैं।

३-एल.पी.जी. गैस द्वारा लगी आग को बुझाने के लिए शुष्क अग्निशामक यंत्र का उपयोग करना चाहिए।

 ४- बिजली के तारों उपकरणों धात्विक पदार्थ से लगी आग को बुझाने के लिए सी. टी.सी. कार्बन टेट्राक्लोराइड यंत्र और हेलो अग्निशामक यंत्र बुझाने के काम में आता है।

 चोट कितने प्रकार के होते हैं और उनसे बचाव के उपाय-
निम्न प्रकार के होते हैं-

 
१-कट जाना या रगड़ खाना -
                            अगर हम किसी ऐसे जगह पर काम कर रहे हैं जिनके सतह पर किनारों में मिट्टी हो कंकड़ हो तो यहां पर हमें नुकीली चीज मिलते हैं जिनसे हमें कट लगने की संभावना या खरोच की संभावना अधिक होती है तो इसके बचाव के लिए हमें चमड़े के दस्ताने और कपड़े अच्छे पहनने चाहिए।

२-मांसपेशियों तथा जोड़ों में तनाव-
                                       हम कभी-कभी जोश में आकर कोई भारी चीज उठा लेते हैं जिससे हमें हमारे मांस पेशियों में जकड़न दर्द हो जाता है और यह हमें झटका देने के कारण मुंह भी सकते हैं अंततः रीड की हड्डी को सीधा रखते हुए बोझ को उठाना चाहिए।

३-पैर या  हाथों का कुचला जाना-
                                        हमें ध्यान में रखना चाहिए कि जब भी हम कोई सामान जो हमने उठाया है अगर वह बाइडियो में नीचे रखना है तो अपने पांव को बचा करके आराम से नीचे रखना चाहिए नहीं तो हमें पांव में चोट आ सकती है।


पहले ही मैंने आपको आग कितने प्रकार के होते हैं वह मैं बता चुका हूं अब यह आग किस वजह से लगते हैं या इनके लगने के कारण क्या होते हैं वह बताएंगे आपको-

१- विद्युतीय तारों का ढीला होना।
२-विद्युतीय तारों पर अत्यधिक लोड देना।
३-बिजली के शॉर्ट सर्किट हो जाने के कारण।
४-कारखानों में धूम्रपान करने के कारण क्योंकि हम सब धूम्रपान करके बीड़ी या सिगरेट बिना बुझाए फेंक देते हैं जिससे कि वहां पर ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण वहां पर आग लगने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है।




कार्यशाला में आग लगने से बचाव के उपाय-

जैसे कि हम सभी जानते हैं कि अगर हम कोई भी कार्य करने के बाद हम उस सामान को व्यवस्थित ढंग से नहीं रखते हैं तो नुकसान अपना होता है जैसे कि आप अपने औजारों से आपने काम किया फिर उसे उसके स्थान पर नहीं रखा बाय हुए हो सकता है कि आपका पांव फिसल जाए आप को चोट लग सकती है ऐसे बहुत से कारण होते हैं जो मैं आपको आगे बताने जा रहा हूं-
१ - आप तेल वह ज्वलनशील पदार्थों का अलग से कई साला होना चाहिए जिससे कि कार्यशाला में आग लगने के बाद भी आपका ज्यादा नुकसान ना हो।
२-कार्यशाला में काम करने के बाद तेल व गिरीश या चिकने पड़ा के गीले कपड़े आप हटा लें क्योंकि इसे स्पाइकिंग के बाद आग लगने का खतरा ज्यादा रहता है।
३-कार्यशाला में अगर हम विद्युत वायदों की फिटिंग सही से ना करें तो हवा चलने पंखा चलने से वह लूज होते हैं और तब एक दूसरे पर घर्षण करके उनमें चिंगारी निकलती है जिससे आग लगने का खतरा बना रहता है।
४-कार्यशाला में मशीनों के अनुसार उचित विद्युत लोड होना चाहिए ज्यादा लोड होने पर गर्म होंगी मतलब गर्म होंगी और आग लगने का खतरा बना रहेगा।
५-विद्युत कार्यों में जो भी आजाद उपयोग होते हैं इन बातों का आप ध्यान रखें कि वह इंसुलेटेड होने चाहिए नहीं तो इससे मशीनों को और आपको जान मान की हानी और कार्यशाला में भी आग लग सकती है।
६-कार्यशाला में कभी भी धूम्रपान नहीं करना चाहिए क्योंकि उसकी बीड़ी या  सिगरेट के चिंगारी से आग लग सकता है।
७-कॉल साला में आग कभी नहीं लगाना चाहिए मतलब जो भी खराब मटेरियल हो उसको आप बाहर निकाल ले उसके बाद आग लगाएं।
८-वेल्डिंग के गैस सिलेंडर हमेशा एक निश्चित और सुरक्षित स्थानों पर रखें।



      

Monday, 8 June 2020

हिंदी स्टेनो 9 जून 2020









प्राथमिक उपचार 9 जून 2020

द्वितीय विधि-
                  जिस समय आप को ज्ञात हो कि रोगी का जो हिस्सा जला हुआ है जैसे कि अगर सामने का हिस्सा जला है तो उसे पीठ के बल लेट जाएं और अगर पीठ के बल जला है तो उससे पेट के बल लिटाया कंधों के नीचे तकिया या कंबल और अगर कुछ नहीं मिले तो कपड़ों को रखने की कोशिश करें और अपने पास दो व्यक्तियों से अधिक को इकट्ठा ना होने दें

एक व्यक्ति को रोगी के सिर के पीछे घुटनों के बल बैठकर योगी की दोनों बांहों को अपने कलाइयों से पकड़ कर उसके सिर के एरिया लगाएं 30 से 25 मिनट तक दूसरा व्यक्ति रोगी को जीभ को बाहर की तरफ रखें जिससे वायु के अंदर जाने में सुगमता रहे इस प्रक्रिया से फेफड़े अपना काम करना शुरू करते हैं

तृतीय विधि -
           यह है विधि जो प्रकार की होती है-
    
१-मुंह से मुंह लगाकर
२-मुंह से नाक के द्वारा

१- मुंह से मुंह लगाकर-
                              इस विधि से रोगी को तुरंत राहत पहुंचाई जा सकती है इस विधि को शुरू करने के लिए पहले रोगी का मुंह साफ करें अजीब को पकड़कर तीन से पांच बार अंदर बाहर कर के गले को नरम करें क्योंकि विद्युत झटका लगने के बाद रोगी के जबड़े में कसावत आ जाती है यदि दांत आपस में एक दूसरे से जगह लिए हूं तो रोगी के ज बढ़ो को खोलें और उसके मुंह में रुमाल डालकर साफ करें पहले आप स्वयं एक गहरी सांस खींचें और तब उसके मुंह में अपना मुंह में रखकर उसके फेफड़ों में हवा दें।
२-मुंह से नाक के द्वारा-
                                    यह विधि प्राथमिक उपचार के लिए काफी लोकप्रिय है योगी का मुंह वह नाक अच्छी तरह से साफ करें गहरी सांस खींचकर आप अपने मुंह को रोगी की नाक से लगाएं और फेफड़ों में हवा भरने और शीघ्र ही अपना मुंह हटा ले जिससे हवा बाहर आ सके यह प्रक्रिया आपको 15 से 20 बार करनी है।

चतुर्थ विधि - 
कि तुम साथ देने के लिए यंत्रों का भी उपयोग किया दिया जाता है जिन्हें कृतिम् शवशन यंत्र कहते है।
इसमें रबड़ के वालों में से हवा फिल्टर होकर चेंबर में जाती है और इनलेट आउटलेट वाल्व लगे होते हैं जो कि रविवार को दबाने वट छोड़ने के साथ खुलते बंद होते हैं हवा 1 मार्च के माध्यम से जोगी के फेफड़ों में जाती है।

         


प्राथमिक उपचार 8 जून 2020

प्राथमिक उपचार का मतलब होता है कि अगर आपका कहीं एक्सीडेंट हो गया हो तो घटना हो गई हो तो तुरंत जो विचार किया जाता है उसे प्राथमिक उपचार कहते हैं जैसे कि सबसे बड़ी चीज होती है कि आपके खून को रोकना अगर खून रुक जाता है तो फिर हम आसपास डॉक्टर के यहां जा करके अपना इलाज अच्छे से करवा सकते हैं इसके लिए हमें बैंडेज पट्टी आवश्यकता होती है

जैसे की डिटॉल 
दर्द कि गोली
रुई
कच्चा प्लास्टर
उपरोक्त साधनों द्वारा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल ले जाने से पूर्व में प्राथमिक उपचार दिया जाता है या दिया जा सकता है

किसी भी व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देते समय निम्न बातों का ध्यान देना चाहिए
१- दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की चोट देखकर घबराना नहीं चाहिए।

२-जहां भी दुर्घटना हो अगर यह बात आपको जितनी जल्दी पता चले उतनी जल्दी जा करके उसका उपचार मतलब प्राथमिक उपचार करना चाहिए अगर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को बेहोश है खून निकल रहा है तो सबसे पहले उसका खून रोकने की कोशिश करें।

३-प्राथमिक उपचार से पहले यह जांच लें कि उसे चोट या दर्द कहां हो रहा है।
४-दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के पास ज्यादा भीड़ इकट्ठा न होने दें और उसे खुली हवा में बैठाए।
५-अगर व्यक्ति जल गया है तो उसको कंबल से ढक दें अगर वह पेट के साइड जला है तो उसे पीठ के बल लिटाए और पीठ के साइड जला है तो उसे पेट के बल लिटाए।
६-आग लगने व बिजली के झटके आने के संदर्भ में कार्यशाला के मेन स्विच को ऑफ करें और फायर ब्रिगेड को सूचित करें।



प्रारंभिक प्राथमिक उपचार
   
१- अगर किसी व्यक्ति को विद्युत का झटका लगा है तो उसके लिए प्राथमिक उपचार अलग होता है जैसे

A- व्यक्ति को बिजली के संपर्क से सूखी लकड़ी तथा रबड़ के जूते पहनकर तुरंत छुड़ाएं और मेन स्विच को बंद करें यदि ओवरहेड लाइन पर कोई इलेक्ट्रीशियन चिपक गया है तो तुरंत तारों पर लोहे की चैन फेंक कर उनको शॉर्ट सर्किट होने से सप्लाई बंद हो जाएगी।
B- यदि व्यक्ति झुलस गया हो-
                                      यदि कपड़ों में से चिंगारी निकल गई हो तो तुरंत भुजाएं यदि शरीर के किसी भी भाग में छाले पड़ गए हो तो उनके ऊपर दबाव डालकर उन्हें फोड ना नहीं  चाहिए।
C-यदि व्यक्ति झटका खाने के बाद बेहोश है तो-
                    यदि व्यक्ति झटका खाने के बाद बेहोश हो गया है तो पहले आप यह जांच करने कि उसके हृदय की गति चल रही है कि नहीं और हाथ की नब्ज देखें अगर सही चल रही है तो सांस क्रिया दे कर के आप उसमें नाक से नाक या मुंह से मुंह विधि द्वारा ऑक्सीजन दे सकते हैं ।
रोगी को प्राथमिक उपचार देने के बाद तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें।
प्राथमिक उपचार की कुछ विधियां होती हैं जैसे कि
१-प्रथम विधि- 
                     योगी के वस्त्रों को सर्वप्रथम ढीला करें रोगी को दोनों भुजाओं को आगे की ओर से लाएं रोगी के एक तरफ वीरासन बना कर बैठे अपने दोनों हाथों की अंगुलियां द्वारा उसकी पसलियों में इस तरह आकृति बनाएं की अंगूठी मिल जाए।
अबे घुटनों पर वजन देकर अपने शरीर के वजन को डालते हुए पसलियों के ऊपर दबाव बनाएं दो 3 सेकंड के लिए और फिर हटा दें और फिर उसके फेफड़ों में स्वास्थ क्रिया आरंभ करें कम से कम से कम 5 से 20 मिनट तक की होनी चाहिए

                

                                    

Saturday, 6 June 2020

आदेश आत्मक चिन्ह ०६जून २०२०

1- कार्य करने से पूर्व अथवा बाद में इन चिन्हों का आदेश दिया जाता है जैसे यहां पर ग्लास लगा कराएं इसके बाहर ग्लास निकाल दें आदि।
२-इनका आकाश गोला और इनकी पृष्ठभूमि नीली होती है जिसके ऊपर सफेद रंग का संकेत चिन्ह लगा होता है जिसके अनुसार हम उस जगह पर कार्य करते हैं।
 



सूचनात्मक चिन्ह-

१-  इनका आकार गोला होता है और इनकी पृष्ठभूमि हरे रंग की और सफेद होता है।
२- जैसे प्राथमिक चिकित्सा दल पेयजल पुरुष और महिला प्रसाधन।


चेतावनी चिन्ह-
                    १-इन चिन्हों द्वारा आने वाले खतरे की चेतावनी दी जाती है जैसे बिजली के झटके भूकंप सुनामी आदि।
  २-  इनका आकार त्रिकोण होता है चिन्नू की पृष्ठभूमि पीले रंग की होती है तथा संकेतिक चिन्ह बॉर्डर काले रंग का होता है जैसे आग सर के ऊपर हेलमेट लगाना लिफ्ट पर बैठना आदि।
  


Friday, 5 June 2020

सुरक्षा चिन्ह 6 जून 2020

सुरक्षा जिन कार्यशाला में या सड़क पर हर जगह आपको सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए  चिन्ह लगे होते हैं।


1- निषेधात्मक चिन्ह 
                             -निषेधात्मक का मतलब होता है निषेध जैसा चिन्ह लगा हो मतलब यहां पर यह कार्य करने के लिए मनाही है या रुकावट है जैसे कि कहीं पर पेट्रोल लेने आप जाओगे तो पेट्रोल टंकी पर चिन्ह लगे होते हैं कि आप सिगरेट न पीने यह माचिस न जलाएं
जैसे कि-
1- निषेधात्मक के जितने बीच में आपको मिलेंगे वह हमेशा गोलाकार में बनाए गए होंगे।
2-इन चिन्हों में बॉर्डर लाल रंग का क्रॉस बना ही होगा।
3- निषेधात्मक चिन्ह के उदाहरण हैं जैसे कि धूम्रपान न करना आग न जलाना जलती आग को जल से ना बुझाना ।

Wednesday, 3 June 2020

सुरक्षा के प्रकार 3 जून 2020

सुरक्षा तीन प्रकार की होती है--
                                         1-  शरीरकी सुरक्षा ।
                                          2-  कार्य की सुरक्षा।
                                          3- मशीन औजार और उपकरण                                                 की  सुरक्षा।
 1--शरीर की सुरक्षा--
           1- लाइन पर या मशीन पर कार्य करते समय ढीले या  लू ज कपड़े न पहने।
          2- चलती हुई मशीन पर कार्य न करें जैसे उसके पूर्वजों को निकालना और चलती हुई मोटर के ढक्कन या उसके पंखे का ढक्कन निकालना।
          3- चलती हुई मशीन किसी भी प्रकार का कार्य या उसके अनुसार तेल या गिरीश को ना देना ।
        4- किसी अस्थान पर या कार्यशाला में अगर आग लगे तो आज के अनुसार बुझाने का प्रयोग करें मतलब जैसे अगर तेल पेट्रोल से आग लगी है तो उसके ऊपर देख डालने या झाग वाली गैस डालें बिजली से लगी आ गए तो उस पर रेत या सूखी मिट्टी डालें।
       5- बैटरी को उठाते हुए रखते समय कपड़ों को बचा कर रखें ताकि कपड़ों में तेजाब न लगे और जब बैटरी चार्ज हो रही हो तो उसमें अनावश्यक झांके नहीं या उंगली ना करें। 
        6- हाथ से उपयोग होने वाले औजारों में तेल और गिरीश का उपयोग कॉल करने से पहले औजारों को पुणे साफ करें। 
        7- कार्यशाला में हमेशा साफ सफाई रखनी चाहिए जैसे कि तेल गिरीश या लोहे का बुरादा आदि अगर गिरा हो तो उसे साफ करवा लें नहीं तो पैर फिसल सकता है।


       कार्य की सुरक्षा 

1-। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके बारे में कोई जानकारी रखें और उनके हिसाब से ड्रॉइंग शीट तैयार करें।
2-। मशीन को खोल दे या भागते समय उसको आराम से खोले ताकि उसका नेट या किसी भी प्रकार का कोई भी पूजा क्षतिग्रस्त ना लगाते समय उसको ध्यान दें उसमें गए या किसी प्रकार का लूज नट ना हो 
2- चलती हुई मशीनों पर कार्य नहीं करना चाहिए इससे हमें शरीर और मशीन की दोनों की सुरक्षा रहती है।
3- मशीनों पर कार्य करते समय वहां पर भी ना हो इससे आपका ध्यान भटकता है और और दुर्घटना का चांस बन जाता है।


     मशीन और औेजार उपकरण की सुरक्षा--

1- किसी भी पार्ट को खोलने के लिए उसके द्वारा सुनिश्चित की गई नट बोल्ट जैसे कि वैसे ही रिंच उपयोग करें।
2- नुकीले औजारों का धार  भी खराब नहीं होना चाहिए क्योंकि उसके बिना हम कोई भी कार्य नहीं कर सकते ।
3- पाइप को काटने के लिए हेक्सा का ही उपयोग करें और उसकी ब्लेड अधिक टाइट नहीं होना चाहिए नहीं तो टूट जाता है।
4- मशीनों पर कार्य करने से पहले उसे साफ कर लेनी चाहिए।
5- जो मशीनें बार-बार खराब हो रही है तो उन्हें आप वहां से हटा दें नहीं तो दुर्घटना का चांस बन सकता है।
6- चलती हुई मशीन में लाइट कट  जाए तो उसका मेन स्विच बंद कर दें अन्यथा दुर्घटना हो सकती है।
7-चलती हुई मशीन में अनावश्यक की आवाज आने पर उसे तुरंत बंद कर दें नहीं तो दुर्घटना हो सकती है।
8-जब मशीन पर कार्य हो रहा हो तो उसके मेन स्विच को बंद करें एमसीबी के पास में एक लेवल लगाएं उस पर लिखें कि यहां पर कार्य हो रहा है तो इससे कोई भी अनावश्यक व्यक्ति या बाहरी व्यक्ति आकर एमसी बी भी नहीं चालू करेगा और आप दुर्घटना के शिकार नहीं होंगे ।

       

Monday, 1 June 2020

इलेक्ट्रीशियन के रोजगार पाने के अवसर 2 जून 2020

2 वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद निम्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बह जाते हैं वह निम्नलिखित है--
1-पूरे भारतवर्ष के विद्युत विभाग में।
2-भारतीय रेलवे में
3-भारत सरकार द्वारा संचालित सभी क्षेत्रों में भी आप रोजगार पाने के काबिल हो जाते हैं
4-प्राइवेट है या गवर्नमेंट जॉब आपके लिए ऑटोमोबाइल होटल हॉस्पिटल सिनेमाघर आज मैं आपको रोजगार पाने के अवसर बढ़ जाते हैं।

अगर आप जॉब मैं करके कोई अपना स्वरोजगार भी लगाना चाहे तो भी आपके लिए रास्ते खुल सकते हैं जैसे कि---
1-आप अपने शहर या गांव के एरिया में आप अपनी स्वेटर की दुकान या कॉन्प्लेक्स खोल सकते हैं जिससे मोटर वाइंडिंग फ्रिज मोटर आ दि की मरम्मत करके भी आप अपना रोजगार चला सकते हैं।
2-घर-घर जाकर के घरेलू वायरिंग करके उनके यहां पंखे लगाना ट्यूबलाइट लगाना आदि ऐसे घरेलू काम होते हैं जैसे आप कहीं भी जाकर के यह काम कर सकते हैं।
3-आप शादियों में जन्मदिन पर जेनरेटर लेकर या उनकी लाइट डेकोरेशन में भी और साथ ही आप छोटे रिटर्न फॉर्म भी बना सकते हैं जिससे आप किसी भी फंक्शन में जाकर अपना रोजगार चला सकते हैं।

दो व्यवसायिक संबंधित सुरक्षा और सावधानियां क्या क्या बरतनी चाहिए उसके लिए भी को कुछ उपाय दिए गए हैं--
                   
                व्यवसायिक सुरक्षा क्या है----

          कार्य क्षेत्र में श्रमिकों को शारीरिक व मानसिक क्षति से बचाना है सुरक्षा कहलाता है।

        विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की संयुक्त समिति के अनुसार।   
                    *व्यवसायिक स्वास्थ्य सभी व्यवसायों में श्रमिकों के शारीरिक मानसिक और सामाजिक कल्याण के सर्वोच्च स्तर की देखभाल करना कार्य स्थितियों के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य बाधाओं को रोकना एवं व्यवसाय में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा करना।
    
           सुरक्षा सावधानियां----
   विद्युत का कार्य करते समय हमें किन किन बातों का ध्यान और क्या क्या सावधानियां रखनी चाहिए इसके बारे में हम आपको इस हिटिंग में बताएंगे तो आप इसे ध्यान से पढ़ें और लिखें---
  1-बिना इंसुलेटेड के कोई भी हजार अपने पास ना रखें और ना ही उसका यूज़ विद्युत लाइन में करें।
2-।  अपने साथ एक हेल्पर जरूर रखें।
3--आप कार्य स्थल पर जाने से पहले उचित वेशभूषा का उपयोग करें मतलब पेंट सेट जो भी पहने ज्यादा लूज न पहने टाइट होना चाहिए इससे यह होता है कि आपका सेट फ्रेंड हवा में ना हुए जिससे कोई और वायर आप के संपर्क में न आए
4-- जिस मशीन के बारे में जानकारी ना हो उसे व्यर्थ न छुए या न चलाएं।
5-- अपने साथ प्राथमिक उपचार व आग बुझाने का यंत्र हमेशा साथ रखें ताकि किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए हम तैयार रहें।
6- सुरक्षा चिन्हों वह अपने सीनियर के निर्देशों का अनुपालन जरूर करें।
7- किसी भी मेल लाइन पर कार्य करते समय अपने सीनियर से बात कर ले और उनसे लिखित प्रमाण पत्र ले ले ताकि मेन बोर्ड से कोई दिक्कत न आवे।
8- मेन लाइन पर काम करने से पहले सब स्टेशन के मेन बोर्ड पर एक बड़ा सा लेबल लगा दे जिससे पता रहे कि आगे लाइन पर काम हो रहा है तो उसे कोई अनजाने में बंद या चालू नहीं करेगा यह आपकी सुरक्षा है।
9- हाथ में दस्ताने और के जूते होने चाहिए।
10- कार्यशाला में लगी मशीनें पैनल की देखभाल प्रतिदिन अवश्य करें जिससे की साफ-सफाई भी होती रहेगी और किसी फाल्ट होने का भी डर नहीं रहेगा।
  

      दुर्घटना से बचाव----
  1-।  अपनी एक कार्यशाला में सुरक्षा चिन्हों का पोस्टर अवश्य लगाएं मशीनों पर खतरे का चिन्ह बनाएं और बाहरी आदमी का प्रवेश वर्जित करें।
2- कार्यशाला में आग बुझाने की रेट से भरी बाल्टी या आग बुझाने के यंत्र सही स्थान पर रखें ताकि हम किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए तैयार रहें।
3- कार्यशाला में घर में उद्योग में मेन शूज ऐसे स्थान पर लगाएं जहां पर इलेक्ट्रीशियन या कोई अन्य व्यक्ति आसानी से पहुंच सके।
4-- आप अपने औजारों को ऐसे स्थान पर रखें ताकि वह आसानी से मिल सके और उन में बारिश के मौसम में तेल या गिरीश लगाते रहे हैं जिन से जंग न लगे।