Sunday, 31 May 2020

स्टेनोग्राफी हिंदी 1 जून

स्टेनोग्राफी के अंग्रेजी में चार प्रणालियां हैं 1- पिटमैन 2- स्लोन डूपलायन 3-ग्रीग और 4 डटन ।
पिटमैन ही एक ऐसी प्रणाली है जिसके जानने वाले अधिकतम संख्या में मिलेंगे और हिंदी वर्णमाला भी 1 अक्षरों से अधिक मिलते-जुलते पिटमैन के शब्द हैं स्टेनोग्राफी आरंभ करने के लिए एक बारी उमर लंबी नोटबुक होनी चाहिए जिसकी लाइन कम से कम 1 सेंटीमीटर या 3 बटा 8 इंच की हो 3 बटा 8 इंच की दूरी पर हूं उसका कागज ना जाना चिकना और ना ही खुद गोरा होना चाहिए लेखक को नोटबुक को सामने लंबा का रखकर बैठना चाहिए शॉर्ट एंड सीखने के लिए सबसे पहले हमें स्टेनोग्राफी की वर्णमाला सीखनी पड़ती है
वरमाला सीखने के बाद हमें स्वरों पर ध्यान देना पड़ता है इसमें 2 तरीके के स्वर होते हैं मोटे बिंदु और मोटे ड्रेस
इसके बाद हल्की बिंदुओं हल्के ड्रेस पर ध्यान दिया जाता है
इसमें 6 मोटे बिंदु के होते हैं और 6 सुबह हल्की बिंदु के होते हैं ऋषि प्रणाली में 5 तरीके के वर्ग होते हैं या उन्हें हम व्यंजन भी बोल सकते हैं क वर्ग च वर्ग ट वर्ग प वर्ग त वर्ग
का वर्ग में हल्की आड़ी रेखा होती है
ख में हल्की ऑडी क्रॉस रेखा होती है
ग में गहरी आड़ी रेखा होती है
घ वर्गमें गहरी आड़ी क्रॉस रेखा होती हैं
अब आता है प वर्ग
 प हल्की तिर्यक रेखा होती है
फ हल्की तेरी एक्रॉस रेखा होती है
ब गहरी तिर्यक रेखा होती है
भ गहरी तेरी एक्रॉस रेखा
अब आता है च वर्ग
च वर्ग राइट हैंड की साइड होता है
हल्की तिर्यक रेखा राइट हैंड की साइट
छा हल्की तिलक क्रॉस रेखा राइट हैंड
ज गहरी तिर्यक रेखा
झ गहरी तिर्यक क्रोश रेखा 
अब आता है ट वर्ग
ट हल्की सिंधी रेखा
ठ हल्की सिंधी क्रॉस रेखा
ड गहरी सिंधी रेखा
ढ गहरी सिंधी क्रॉस रेखा






स्टेनोग्राफी हिंदी 1 जून 2020

आशुलिपि से हमारा तात्पर्य शीघ्र तम लिपि लेखन विधि से है।
जिसके द्वारा वक्ता की ध्वनियों को एक साथ लिखा वह पढ़ा जा सकता है इसी को आशुलिपि कहते हैं।
आशुलिपि का महत्व भारत में पुरातन काल से माना गया है इसका उपयोग हस्तलिपि की गति बढ़ाने के लिए किया जाता है वर्तमान में इसका उपयोग बहुत बढ़ गया है आजकल पत्रकारिता एवं रोजगार क्षेत्र में इसका विशेष योगदान है शॉर्टहैंड शॉर्टहैंड को प्रचलित करने का विचार सन 1922 में उठाइस समय शॉर्टहैंड की चार प्रणालियां प्रचलित हैं 

इलेक्ट्रीशियन की योग्यताएं 1 जून 2020

एनसीवीटी ने इलेक्ट्रिशियन को 2 वर्षीय प्रशिक्षण के बाद ही आप पूर्ण रुप से इलेक्ट्रीशियन बन सकते हैं
           और निम्न योग्यता प्राप्त कर सकते हैं 
1-विद्युत नियम के अनुसार पावर वायरिंग करना।
2-भारत मानक ब्यूरो के अनुसार चिन्हों संकेतों की पूरी तरह से जानकारी रखें।
3-ट्रांसफार्मर अल्टरनेटर 3 फेज मोटर 1 फेज मोटर की वाइंडिंग मरम्मत उनके रखरखाव के बारे में पूर्ण जानकारी रखने का आपको योग्यता मिल जाता है।
4-एसी लाइन हो या डीसी लाइनों आपको उन लाइनों पर कार्य करने की योग्यता व प्रमाण पत्र मिल जाता है।

इलेक्ट्रीशियन के कर्तव्य 01/06/2020

1-  इलेक्ट्रिशियन का कार्य करने से पहले उसके बारे में पूरी सुरक्षा व जानकारी रखें
2- बिना किसी जानकारी के किसी भी मशीन को हाथ न लगाएं
3-जब तक उस मशीन के बारे में जानकारी ना हो तो उसके साथ छेड़छाड़ ना करें।
4-विद्युत संबंधी कार्य करने से पहले अपने औजारों को इम्सुलेटेड करना  ना भूले।
5- घरेलू विद्युत उपकरण पंखे कूलर गीजर फ्री वाटर कूलर में लगी मोटर की वाइंडिंग को समझना। 

Tuesday, 26 May 2020

Electrician theory 26/05/2020 chapter -1

ट्रेड  परिचय --

                 इलेक्ट्रीशियन वह ट्रेड या व्यवसाय है जिसके अंतर्गत हम बिधुत सम्बन्धी सभी कार्यो में कार्य रत  रहते है इस ट्रेड के अंतर्गत मोटर  ,जनित्र ,कन्वर्टर ,इन्वर्टर ,ट्रांसफॉर्मर घरेलू बैधुतिक उपकरण आदिके बारे में बताया जाता है 

बिधुत की खोज -- थेल्स एम्बर

बिधुत --- 
               आज से लगभग २५००० ई. पूर्व यूनानी बैज्ञानिक थेल्स एम्बर ने कहरवा (कांच )नमक पदार्थ को रेशम से  रगड़कर उसके द्वारा कागज के छोटे छोटे टुकड़े को अपनी और आकर्षित करने में कामयाबी हासिल की थी 
  
बिधुत  की  परिभांषा -- 
                                  इलेक्ट्रान के प्रवाह को बिधुत कहते है 

Monday, 25 May 2020

Date 26/05/2020 OMT

Hello Students
I am Om Prakash Tiwari

Training Officer 

Stenography Hindi

Saturday, 23 May 2020

Bharat College D El Ed Date 23/05/2020

सभी छात्र छात्राओं को सूचित किया जाता है कि 25 मई से परीक्षा फॉर्म भरना प्रारम्भ हो रहे है।  अतः आप अपनी शेष फीस जमा कर तुरंत परीक्षा फॉर्म भरे।  

Stenography Hindi Date 23/05/2020

स्टेनोग्राफी हिंदी एक बेहतरीन भविष्य 

Tuesday, 5 May 2020

Bharat Pvt ITI 06/05/2020

संचार के घटक / तत्व - संचार मैं कुल ७ घटक होते है। 

  1. सन्देश स्त्रोत - सन्देश की पहल एक स्त्रोत से आरम्भ होती है।  यह स्त्रोत किसी व्यक्ति की आंतरिक इच्छा पर निर्भर करता है जो कि  सन्देश भेजना चाहता है।  यह जरूरी नहीं है कि सन्देश भेजने वाला व्यक्ति ही स्त्रोत हो। 
  2. सन्देश - किसी व्यक्ति की बात, विचार अथवा अभिव्यक्ति ही सन्देश होता है जिसे संचार स्त्रोत द्वारा भेजा जाता है।  कोई भी सन्देश लिखित, अलिखित, मौखिक अथवा अमौखिक दोनों ही तरह का हो सकता है।  
  3. कूट संकेतन - आप अपने विचारो एवं भावनाओ को शब्दों, हाव - भावो या मुखाकृति के माध्यम से भी व्यक्त कर सकते है।  मान लो की कोई लेखक अपने विचारो को पुस्तक के माध्यम से छात्रों तक संचरित करना चाहता है तो इसमें लेखक का ज्ञान, लेखन - कौशल, उसकी मनोवृत्ति आदि छात्रों अथवा पाठको तक सन्देश को प्रेषित करने मैं अहम भूमिका निभाते है।  
  4. माध्यम या चैनल - संदेश सम्प्रेषण मैं माध्यम सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है जिसका निर्धारण स्त्रोत द्वारा किया जाता है।  यह औपचारिक अथवा अनौपचारिक दोनों मैं से किसी भी तरह का हो सकता है।  अनौपचारिक चैनल का उपयोग व्यक्तिगत अथवा सामाजिक स्तर जबकि औपचारिक चैनल का उपयोग स्कूल , संगठन , अथवा प्रतिष्ठान मैं किया जाता है। 
  5. विसंकेतन - जब हम कोई  सन्देश किसी व्यक्ति को प्रेषित करते है तब वह सांकेतिक भाषा मैं होता है इसलिए प्राप्तकर्ता तक सन्देश भेजने से पहले उसे विसंकेत किया जाता है जिससे की वह उसे समझ सके।  
  6. प्राप्तकर्ता - जो व्यक्ति संदेशो को प्राप्त करता है उसे प्राप्तकर्ता या ग्राहक कहते है। 
  7. फीडबैक - सन्देश प्रक्रिया का अंतिम घटक फीडबैक होता है।  इसका तात्पर्य सन्देश को प्राप्त करने वाले व्यक्ति की प्रतिक्रिया से है।  For Example जब कोई नेता भाषण देता है तो श्रोतागण ताली बजाकर उसे अपना फीडबैक देते है , जिससे नेता को यह पता चल जाता है की श्रोता उसकी बातों से सहमत है कि नहीं। 

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Monday, 4 May 2020

Bharat Pvt ITI 04/05/2020

संचार के प्रमुख कार्य - प्रत्येक प्रकार के संचार का एक निश्चित उद्देश्य होता हैजिसमे भावनाओ, इच्छाओ आदि का पारस्परिक आदान-प्रदान होता है।  इस प्रक्रिया के निम्लिखित उद्देश्य होते है

  1. संचार प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति स्वयं अपनी भावनाओ, विचारो आदि के विषय मैं जानने और उसे जांचने का प्रयास करता है।  तथा वह दूसरों के भी विचारों और भावनाओ के बारे मैं जान सकता है।  
  2. स्वयं के विषय मैं दूसरों की प्रतिक्रियाओं को जानकर व्यक्ति अपनी पहचान बनाने का प्रयास करता है।  इससे उसे अपनी छवि पर चिंतन मनन करने तथा स्वयं को बेहतर तरीके से समझने का अवसर प्राप्त होता है।  इस प्रकार संचार व्यक्ति की वृद्धि एवं विकास मैं सहायक होता है। 
  3. संचार द्वारा दो या दो से अधिक व्यक्तिओ के बीच सूचनाओं का आदान - प्रदान होता है जिससे उसके मन मैं एक - दूसरे के प्रति कल्याण की भावना विकसित होती है तथा सामाजिक समरसता का मार्ग खुल जाता है।  
  4. संचार व्यक्तिगत संतुष्टि तथा पारस्परिक सौहार्द की भावना को विकसित कर सामाजिक सम्बन्धो की नीव डालता है। 
  5. संचार सूचनाओं की भागीदारी, विचारो के आदान - प्रदान फलस्वरूप निर्णय लेने, चिंतन आदि क्षमताओं के विकास मैं महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  

Saturday, 2 May 2020

BITS 02/05/2020

कंप्यूटर - कंप्यूटर एक ऐसी  इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो दिए गए निर्देशों के अनुसार विभिन्न प्रकार के कार्य कर सकती है. निर्देशों के समूह को प्रोग्राम कहा जाता है।  दूसरे शब्दों मैं हम कह सकते है कि कंप्यूटर एक मशीन जो डाटा को हैंडल करती है।  कंप्यूटर डाटा को Store , Retrieves , Sends,   Receives और Analyzes कर Information उत्पन्न कर सकता है।